आत्मविश्वास की पूंजी को बढ़ाएं। Boost confidence capital। How to succeed। सफलता कैसे पायें

आज के दौर में प्रत्येक व्यक्ति प्रगति के लिए लालायित है । जिसे भी देखो प्रगति की होड़ में शामिल होने को तैयार है । हर कोई सफलता की सीढ़ियां चढ़ना चाहता आपके मन में भी यह इच्छा अवश्य उठती होगी कि आप अपने लक्ष्य में सफलता प्राप्त करें । निरन्तर सफलता की सीढ़ियां चढ़ते चले जायें । ऐसा करने के दौरान आपको किसी भी बाधा का सामना न करना पड़े । जीवन में संघर्ष तो करना ही पड़ेगा क्योंकि ऐसा कोई भी व्यक्ति नहीं है जिसे कि अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए बाधाओं का सामना न करना पड़ा हो । जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए हमें संघर्ष करना पड़ेगा । जिस प्रकार किसी जंगल में शिकार करने के लिए शिकारी अपनी बन्दूक या तीर - कमान आदि को भली - भांति निरीक्षण करके साथ ले जाता है , उसी प्रकार हमें भी जिन्दगी के कर्मक्षेत्र में उतरते समय आत्मविश्वास को जाग्रत रखना होता है । सफलता की सीढ़ियां चढ़ने के लिए आत्मविश्वास किसी लाठी की तरह काम आता है । जिस प्रकार ऊंचे - ऊंचे पर्वतों पर पहुंचने के लिए हमें कोई लाठी या छड़ी हाथ में रखनी पड़ती है , ताकि हम सन्तुलन बिगड़ने पर उसकी मदद ले सकें , वैसे ही कर्मक्षेत्र में कामयाबी हासिल करने के लिए , सफलता की सीढ़ियां चढ़ने के लिए आत्मविश्वास को जाग्रत रखना होता है ।

जिन्दगी की डगर समतल नहीं होती । वह ऊबड़ - खाबड़ व टेढ़ी - मेढ़ी पायी जाती । अगर हम सफलता की सीढ़ियां चढ़ते वक्त जरा भी लापरवाह हो गये हम अवनति की गहरी खाई में जा गिरेंगे । हमारा जीवन अन्धकारमय हो जायेगा । लेकिन यदि हमारे साथ आत्मविश्वास है , अटूट मनोबल है तथा दृढ़ संकल्प है तो हम कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते हुए प्रगति के सर्वोच्च शिखर पर जा पहुचेंगे । चाहे कैसी भी परिस्थिति हो , आत्मविश्वास की पूंजी को कभी भी कम न होने दीजिए । आत्मविश्वास को सदैव जाग्रत रखिये । आत्मविश्वास के बल पर आप जो भी चाहें हासिल कर सकते हैं , जो भी चाहें बन सकते हैं । आत्मविश्वास एक महान शक्ति का दूसरा नाम है । यह दिव्य शक्ति प्रत्येक व्यक्ति को ईश्वर की ओर से मिली है । इसके बल पर वह अनेक महान कार्य कर सकता है । वह प्रत्येक संकट का मुकाबला हँसते - हँसते कर सकता है । आत्मविश्वासी लोग अपने लिए प्रत्येक प्रकार का मार्ग खोज लेते हैं । ऐसे लोगों मित्र भी उत्साही एवं आशावादी ही पाये जाते हैं । आत्मविश्वासी व्यक्ति पूरी तरह आत्मनिर्भर होता है । वह कभी किसी की मदद का मोहताज नहीं होता । आत्मविश्वासी मनुष्य कभी भी हीन भावनाओं का शिकार नहीं बन पाता 

वह कभी भी अपने आलोचकों की परवाह नहीं करता । वह प्रत्येक कार्य को अपने अनुभव , योग्यता एवं सूझ - बूझ से करता है । उसे कोई गुमराह नहीं कर सकता । मानव - जीवन में विश्वास एक उपयोगी एवं महत्त्वपूर्ण गुण है । दुनिया के तमाम कार्य विश्वास के बल पर ही होते हैं । किसी के मन में अपने प्रति विश्वास जमाना एक कठिन कार्य है । इसके लिए बहुत प्रयास एवं संघर्ष करना पड़ता है । ईमानदारी व परिश्रम के बल पर ही आप किसी के मन में अपना विश्वास जमा सकते हैं । लेकिन इससे भी कठिन कार्य है आत्मविश्वास की पूंजी को कायम रखना । अपने आप पर विश्वास रखना , अपनी शक्ति , योग्यता एवं अनुभव पर विश्वास रखना ही आत्मविश्वास है । जब कोई व्यक्ति सन्देह या अनिश्चय का शिकार होता है तो उसके पास सबसे पहले आत्मविश्वास की कमी होती है । यदि सफलता की सीढ़ियां चढ़ना चाहते हैं तो आत्मविश्वास में कमी न आने दीजिए । आत्मविश्वास की कमी होते ही हम अपनी उस शक्ति , योग्यता एवं अनुभव पर ही सन्देह करने लगते हैं जिसके बल पर हम पहले भी अनेक महान कार्य कर चुके होते हैं । यदि हम अपने आत्मविश्वास को सदैव जाग्रत रखना चाहते हैं तो हमें जीवन की महान उपलब्धियों को सदैव याद रखना चाहिये । हमें अपने निश्चय एवं संकल्प को मन में दोहराते रहना चाहिये । हमें अपने लक्ष्य को सामने रखकर आगे बढ़ते रहना चाहिये । हम किसी भी कार्य को बेहतर ढंग से तभी कर सकते हैं जबकि हमें अपने अनुभव , योग्यता एवं शक्ति पर भरोसा होगा । यदि हमें किसी भी कार्य को करने का सही तरीका आता है तो हम उसे गलत ढंग से नहीं करेंगे । अपने आत्मविश्वास को जाग्रत रखने के लिए निरन्तर प्रयत्न की जरूरत होती है । यदि हमें कोई कार्य सौंपा गया है तो हमें उसे करने से पूर्व एक आदर्श कार्य - योजना तैयार करनी चाहिये । हमें कार्य को ठीक वैसा ही करना चाहिये जैसा कि कोई चाहता । यदि हम कार्य को मनमाने ढंग से करेंगे तो कार्य सौंपने वाले को सन्तुष्ट नहीं कर सकेंगे । हमें प्रत्येक कार्य वायदे पर ही पूरा करना चाहिये । किसी से किये गये वायदे को वही व्यक्ति निभा सकता है जो कि पूरी तरह आत्मनिर्भर हो । आत्मनिर्भर होने के लिए आत्मविश्वासी होना पहली शर्त है । आपको जो भी कार्य सौंपा गया है उसे पूरा करने में अपनी पूरी सूझ - बूझ एवं कर्तव्यनिष्ठा का परिचय सकें । दीजिए । अपनी ओर से पूरा प्रयास करें कि आप उस कार्य को वक्त रहते पूरा कर यदि हम संसार के महान लोगों की सूची देखेंगे तो हमें उनमें ऐसे ही सफल लोग नजर आयेंगे जिनमें गजब का आत्मविश्वास था । यह आत्मविश्वास ही किसी भी व्यक्ति की महान उपलब्धि माना गया है ।


अपने आप पर जिस व्यक्ति को विश्वास हो जाता है , वह समझने लगता कि वह जिस कार्य में भी हाथ डालेगा , उसमें निश्चय ही कामयाब होगा । वह उसे पूरा करके ही दम लेगा । कुछ लोग ऐसे भी देखने में आते हैं जो कि अपनी धुन के पक्के होते हैं । अपनी कार्यशक्ति पर उन्हें पूरा भरोसा होता है । उनके विश्वास को लोग चाहे मूर्खतापूर्ण ही क्यों न समझें । वे अपनी धुन में पक्के होने के कारण उसी कार्य को करेंगे जिसकी उन्होंने कल्पना की थी । उन्हें यही कार्य की धुन उनकी मंजिल की ओर खींचे लिये जाती है । अपने आत्मविश्वास के बल पर वे किसी भी शक्ति को पहली ही मुलाकात में प्रभावित कर सकते हैं । ऐसे लोगों पर हर पल एक ही धुन सवार रहती है कि हम हर हाल में कामयाब होकर रहेंगे । उनकी यह बात ही उन्हें सफलता की सीढ़ियां चढ़ने में सहायक सिद्ध होती हैं । यदि कोई मनुष्य खुद को किसी कार्य का उस्ताद मानने लगता है और वह निपुण भी हो जाता है । उसके प्रत्येक शब्द से आत्मविश्वास की भावना टपकती है उसके प्रत्येक कार्य में आत्मविश्वास की अमिट छाप मिलती है । निःसन्देह आत्मविश्वास एक महानतम शक्ति है , लेकिन मनुष्य इसका उपयोग अपने हित में कहां तक कर पाता है , यह देखना उसका कार्य है । उसे चाहिये कि वह आत्मविश्वास को सदैव जाग्रत रखे तथा उसका भरपूर व्यंग उठाये । आपके पास रखी हुई कोई भी वस्तु तभी उपयोगी सिद्ध हो सकती है जबकि आप उसके बारे में पूरी जानकारी रखते हैं , उसके स्वभाव , गुण या अवगुण से परिचित यदि आप किसी वस्तु को रखकर भूल जाते हैं तो वह उपयोगी होते हुए , अनुपयोगी हो जाती है । यदि कोई जीवन रक्षक दवा समय पर खाई जाये तो वह किसी का जीवन बचा सकती है लेकिन समय गुजर जाने पर उसकी कोई अहमियत नहीं रह जाती । ठीक इसी प्रकार आत्मविश्वास की कीमत भी जाग्रत होने पर ही । यदि आपका आत्मविश्वास जाग्रत है तो आप जो चाहें कर सकते हैं , जो चाहें बन सकते हैं । आत्मविश्वासी व्यक्ति अपनी प्रत्येक कल्पना को साकार कर सकता है । वह कभी भी हताश - निराश या निरुत्साहित नहीं होता । उसके कार्य कभी भी आधे - अधूरे नहीं पाये जाते । वह कभी भी आज के कार्य को कल पर नहीं टालता । यदि आप जीवन में कोई भी महत्त्वपूर्ण कार्य करना चाहते हैं तो अपने आत्मविश्वास को अवश्य जगा लें , उसके अभाव में आप किसी भी कार्य को समय पर तथा सुचारु रूप से नहीं कर पायेंगे । जरा सोचिये कि उस जंगली जानवरों के पालक को क्या सफलता मिलेगी जो कि क्रोध से भरे जंगली पशुओं के बाड़े में पहली बार ही भयशंकालु एवं अविश्वासीहोकर उतरा है तथा जो अपने मन में सोच रहा है - ' इन जंगली जानवरों को वश में करने का प्रयत्न तो मैं अवश्य करुंगा हालांकि मुझे यह विश्वास नहीं कि मैं इन्हें अपने वश में कर पाऊंगा । अफ्रीका के जंगलों में रहने वाले भयंकर चीते को वश में कर पाना - उस पर विजय हासिल करना अत्यन्त कठिन कार्य है । बहुत - से लोग ऐसे हो सकते हैं जो कि इन खूखार पशुओं पर काबू पा लेते होंगे लेकिन मुझे नहीं लगता कि मैं इन्हें काबू कर पाऊंगा । मुझे तो अपनी शक्ति एवं सामर्थ्य पर सन्देह हो रहा है । ' ऐसी मनोवृत्ति के साथ यदि कोई जंगली पशु पालक उस खूखार पशुओं के समक्ष जाता है , यदि वह सन्देह , दुर्वलता एवं भय के विचारों से युक्त वहां पहुंचता है तो सम्भावना यही है कि वे खूनी जानवर उसकी बोटी - बोटी नोंच लेंगे । वह उन्हें दृढ़ इच्छा शक्ति , अटूट मनोबल एवं आत्मविश्वास के द्वारा ही परास्त कर सकता है । इसके लिए यह भी जरूरी है कि वह पहले अपनी आंखों के वार से ही उन्हें परास्त करे । उन्हें आंखों का क्रोध ही भयभीत कर सकता है । इसके विपरीत यदि वह व्यक्ति जंगली पशु से डर जाता है तो समझ लेना चाहिये कि उस जंगली पशु की शक्ति पहले से भी कहीं अधिक हो जायेगी । इस प्रकार वो उस पशुपालक की जान को ही खतरा बन जायेगा । वास्तविकता तो यह है कि जब तक किसी मनुष्य को यह पक्का विश्वास न हो जाये कि वह जिस पदार्थ को हासिल करना चाहता है , उसे अवश्य ही हासिल कर सकता है , तब तक वह पूरी मेहनत तथा लगन के साथ उसे पाने के लिए जुट ही नहीं पायेगा । यही बात तो सफलता के लिए बेहद जरूरी है । यह पक्का निश्चय , अपने लक्ष्य को मन - ही - मन दोहराना तथा लक्ष्य प्राप्ति की कार्य - योजना को याद रखना ही वे गतिविधियां हैं जो कि आत्मविश्वास को जाग्रत रखती हैं । यह आत्मविश्वास ही किसी व्यक्ति को सफलता के सर्वोच्च शिखर तक ले जाता है । उसकी इच्छा - शक्ति दुगुनी हो जाती है । न जाने उस व्यक्ति को एक कुशल व्यापारी बनाने में कितनी देर लगे जो कि हर वक्त सन्देहयुक्त बना रहता है , जो कि हर वक्त सोचता है - ' इस कार्य को करूं या न करूं ? ' वह इसी दुविधा में पड़ा , चिन्ता के अथाह सागर में डूबा रहता है , वह कभी भी कामयाबी हासिल नहीं कर पायेगा । वह उस प्रकार की मनोवृत्ति में कोई भी महान कार्य नहीं कर पायेगा । आपके मन को सदैव अग्रणी होना चाहिये , उसे आगे - आगे चलना चाहिये । शरीर एवं इन्द्रियां उसी का अनुसरण किया करती हैं । कोई भी मनुष्य उधर ही मुंह करके है जिधर उसे उसका विश्वास ले जाता है । हम उसी कार्य को पूरा कर सकते हैं , जिस कार्य को पूरा करने के बारे में अपनी सफलता पर हमारा पक्का विश्वास होता है । उस नौजवान को धनवान बनने में न जाने कितना वक्त लगे जिसे अपने ऊपर आगे बढ़ता

तनिक भी भरोसा नहीं कि वह धन उपार्जित कर सकेगा । अगर उसके मन में यह विश्वास जम चुका है कि इस दुनिया में ऐसे कुछ ही लोग हैं जो कि धनवान बन सकते हैं । अधिकांश प्राणी निधन हैं तथा निर्धन ही बने रहेंगे - शायद मैं भी उन्हीं में से एक हूं जो कि कभी भी धनवान नहीं हो सकते । यदि कोई विद्यार्थी विद्यालय में जाकर निरन्तर यही सोचता है कि मैं इस काबिल कहां जो ग्रेजुएट बन सकूँ । मुझे तो लगता है कि मैंने विद्यालय में दाखिला लेकर ही भूल की है । जरा सोचिये ऐसे लोग कैसे ग्रेजुएट बन सकते हैं जबकि उनके अपने विचार ही इतने छोटे हैं , जबकि उनमें आत्मविश्वास ही नहीं है । वह नवयुवक कभी भी उच्च अधिकारी नहीं बन पायेगा जो कि हमेशा सोचता है - ' मुझे प्रयास करने से क्या लाभ - जवकि मैं जानता हूं कि मैं उच्च अधिकारी वन ही नहीं पाऊंगा । यह संसार विजयी लोगों पर ही विश्वास करता है । अगर आपमें गजब का आत्मविश्वास है , कर्तव्यनिष्ठा है तथा कुछ बनने का संकल्प है तो आप भी विजयी बन सकते हैं । आप पर भी लोगों का विश्वास जम सकता है । दूसरों का विश्वास जीतने से पूर्व हमें अपने खोये हुए आत्मविश्वास को जगाना होता है । आपका जीवन अनमोल है । यह आपको व्यर्थ ही गंवाने के लिए नहीं मिला । इसका प्रत्येक क्षण महत्त्वपूर्ण है । इसके प्रत्येक क्षण का सदुपयोग कीजिए । आप एक जिम्मेदार नागरिक हैं । आपके कन्धों पर दायित्वों का भारी बोझ है । समाज को आपसे बहुत - सी उम्मीदें बंधी हैं । आप समाज की उम्मीदों की कसौटी पर तभी खरे उतर पायेंगे यदि आपमें आत्मविश्वास की कोई कमी नहीं है । यदि आप अपने आत्मविश्वास को सदैव जाग्रत रखते हैं । इतिहास इस बात का साक्षी है कि बड़े - बड़े समाज - सुधारक , महापुरुष एवं वैज्ञानिक आत्मविश्वास के बल पर ही अपने लक्ष्य तक पहुंच सके हैं । आत्मविश्वास को जगाकर ही वे अपनी कल्पनाओं को साकार कर सके हैं । अगर अब्राहम लिंकन में आत्मविश्वास की जरा भी कमी रही होती तो वे कभी भी देश के महत्त्वपूर्ण पद को न संभाल सकते थे । यदि कोलम्बस में आत्मविश्वास का अभाव रहा होता तो वह समुद्री सफर के दौरान आने वाली दिक्कतों का कभी भी डटकर मुकाबला न कर सकता था । यदि जेम्सवाट में आत्मविश्वास न रहा होता तो वह कभी भी भाप जैसी महान शक्ति का आविष्कार न कर पाता । अगर जॉर्ज स्टीफैन्सन में आत्मविश्वास जाग्रत न हो पाता तो वह कभी भी भाप से चलने वाले प्रथम रेल के इन्जन बनाने में कामयाब न हो सकता था । यदि राइट बन्धुओं में आत्मविश्वास की जरा भी कमी होती तो वे द्रुतगामी हवा जहाज का आविष्कार न कर पाते ।

आत्मविश्वास के बल पर ही सिकन्दर महान जैसे एक युवक ने विश्वविजेता का रूप धारण कर लिया था । नेपोलियन ने सारे संसार की जड़ें हिलाकर रख दी थीं । उस वर्ष सिकन्दर महान की क्या आयु थी ? मात्र बीस वर्ष । उसने इतनी - सी उम्र में आत्मविश्वास के बल पर इतिहास में अमर विजेता का स्थान हासिल किया । अगर आप भी सफलता की सीढ़ियां चढ़ना चाहते हैं , यदि आप भी अपने जीवन को सुखमय बनाना चाहते हैं , अगर आप भी अपने जीवन के अभावों को दूर करना चाहते हैं तो अपने सोये हुये आत्मविश्वास को जगाइये । यदि आप अपनी तमाम कल्पनाओं को साकार करना चाहते हैं तो आत्मविश्वास की पूंजी को कभी भी कम न होने दीजिए । जीवन में आत्मविश्वास को अपनाकर ही आप अपने जीवन को सार्थक बना सकते है  

                                 दुर्गेश कुशवाहा द्वारा लिखित




Comments

Motivational blog

महान व्यक्तियों के विचार।

मुश्किल समय में अपने लोगों को कैसे प्रेरित और प्रेरित करें। How to motivate and inspire your people in difficult times

A trick in the life of man!